जिंदगी बीत जायेगी यही सोचते कि लोग क्या कहेंगे, उनका क्या, माँस है सबका नोचते कि और जिंदगी बीत जायेगी यही सोचते कि लोग क्या कहेंगे, उनका क्या, माँस है सबका नो...
गरीबी,अज्ञानता के कारण, जीवन को बोझ समझ दब जाते हैं, आगे चलकर देश की प्रगति में, प्र गरीबी,अज्ञानता के कारण, जीवन को बोझ समझ दब जाते हैं, आगे चलकर देश की प्रगत...
गुलामी की बेड़ियाे तोड़कर स्वतन्त्रता की इबारत लिखेंगे हम। गुलामी की बेड़ियाे तोड़कर स्वतन्त्रता की इबारत लिखेंगे हम।
कुछ तो कहना है तुमसे क्या कहूँ क्या छिपाऊं याद करूँ मैं तुमको या फिर से भूल जाऊँ। कुछ तो कहना है तुमसे क्या कहूँ क्या छिपाऊं याद करूँ मैं तुमको या फिर से...
पर अग़र मैं कहूँ, मैं वही जानती हूँ जो मैं मानना चाहती हूँ मैं तुम्हें पाना चाहती हूँ पर अग़र मैं कहूँ, मैं वही जानती हूँ जो मैं मानना चाहती हूँ मैं तुम्हें पाना...
बेवफ़ा बेवफ़ा